पेरजागढ़ (Seven Sisters Hill) पर फिर से हमेशा के लिए बंद।


मधुमक्खियों के हमले में घायल सैलानियों के चलते वन विभाग का निर्णय
मधुमक्खियों के हमले में  आजतक कई की मौत, तो  शेकडो हो चुके है गंभीर घायल.

यश कायरकर,;       
          तलोधी वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले, गोविंदपुर क्षेत्र के पेरजागढ़ (सेवन सिस्टर हिल) पर पर्यटन के लिए आए  25 सैलानियों को मधुमक्खियों ने हमला कर एक दिन पूर्व घायल कर दिया जिसके चलते एहतियात की तौर पर वन विभाग द्वारा पेरजागड़ रास्ते पर बैरिकेड लगाकर हमेशा के लिए बंद कर दिया। 
                   मधुमक्खियों के शेकडो छातों से यह अत्यंत खतरनाक और जानलेवा जगह बन चुकी है. ज्ञात हो कि   शनिवार  8 अप्रैल 2023 को 2 दो लोगों को मधुमक्खियों के हमले में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे तभी से वन विभाग ने यहां पर प्रवेश बंदी कर बॅरीकेट्स लगा दिए थे. तब से यहां पर मधुमक्खियों के छात्रों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और जिस रास्ते से लोग पहाड़ी पर चढ़ते हैं वहां काफी नजदीक नजदीकी बड़े-बड़े छाते बने हुए हैं, ईस के बावजूद कुछ स्थानिक लोगों की सहायता से यहां पर अक्सर सैलानी जाते रहते हैं और हर रोज ही यहां मधुमक्खियों के डंक से कुछ सैलानी घायल होकर वापस लौट जाते हैं. पर जल्द ही यहां पर कोई बहुत बड़ी दुर्घटना होने से  जिसमें कई लोगों की जान जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस और वन विभाग ने काफी गंभीरता से ध्यान देते हुए यहां पर सख्ती से प्रवेश बंदी दी है।                              
                 वास्तव में  यह संपूर्ण परिसर वन व्याप्त है तालोधी बालापुर वन परीक्षेत्र अंतर्गत आने वाला यह पेरजागड (सात बहिनी) पहाड़ ताडोबा अभयारण्य से महज 22 किमी दूरी पर है  और नव घोषित घोड़ाझरी अभयारण्य एकदम सटा हुआ है . इस परिसर में बड़ी मात्रा में वाइल्ड लाइफ है यहां जंगली पशुओं का विचरण बड़ी मात्रा में होता है. जिसमें बाघ , तेंदुआ ,भालू, भेडीए, जंगली कुत्ते, जैसे बड़े जानवर हमेशा विचरण करते रहते हैं. और इस पत्थर की पहाड़ी पर बड़े-बड़े मधुमक्खियों के सैकड़ों छाते लटके हैं .            
                 फिर भी बड़ी मात्रा में सैलानी लोग , कुछ श्रद्धालु और ज्यादातर प्रेमी-युगल  युवक-युवतीया हर रोज यहां आते रहते हैं . जंगली जानवरों के हमले से बेखबर अपनी जान जोखिम में डालकर हमेशा युवक-युवती या यहां दुचाकी और सैकड़ों कारों से रंगरलिया मनाने के लिए  जंगल में आते रहते हैं . और हर इतवार को मानो हजारों लोगों का यहां मेला सा लगा रहता है . और साथ में लाई हुई प्लास्टिक, पानी की बोतल,  खाना खाने के बाद प्लास्टिक और थर्माकोल की पत्रावली, बच्चों के डायपर को इस परिसर में फेंक दिया जाता है. जिस वजह से इस जंगल परिसर में प्लास्टिक प्रदूषण फैलता है।          
*मधुमक्खियों के हमले में  आजतक कई की मौत, तो  शेकडो हो चुके है गंभीर घायल.*      
*                इस पहाड़ पर स्थित मधुमक्खियों द्वारा यहां आने वाले सैलानियों पर साल भर में *शेकडो बार*  हमले किए जाते हैं , जिसमें यहां मधुमक्खियों के हमले में  इंसान मरने की भी घटनाएं हुई है. यहां पर 2013-14 में एक घटना में 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे और  मधुमक्खियों के हमले में पहाड़ से नीचे गिर कर एक पर्यटक मारा गया था . और  आज भी अक्सर इन मधुमक्खियों के हमले में लोग घायल  होते रहते हैं.  कुछ दिन पूर्व ही यहां आए उमरेड और नागपुर के मेडिकल स्टूडेंट्स को  मधुमक्खियों के हमले में घायल बेहोशी के हालत में रेस्क्यू किया गया था. उसके बाद में गडचिरोली से आए कुछ पर्यटन वह भी यहां पर मधुमक्खियों के हमले में काफी गंभीर रूप से घायल हुए थे,और  फिर से शनिवार  8 अप्रैल 2023 को 2 दो लोगों को मधुमक्खियों के हमले में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, दो-चार दिन पूर्व नागपुर से आज कुछ पदों के साथ सावरगांव के कुछ पर्यटक भी गए थे उन पर भी मधुमक्खियों ने हमला कर दिया था जिसकी वजह से वो रास्ते से लौट आए थे और उसके बाद फिर आज कल शाम को मधुमक्खियों का फिर हमला हुआ जिसमें 25 से ज्यादा सैलानी घायल हो गए जिनमें कुछ को गंभीर अवस्था में   उनके साथी ले गए.
*                      *कोई बहुत बड़ी अनहोनी की आशंकाओं के चलते वन विभाग सख्त रवैया.*
  वन विभाग द्वारा बार-बार यहां पर्यटन के लिए मना करने के बावजूद कुछ पैसे की लालच में नागपुर  की कुछ  टूर एंड ट्रेवल्स के टूरिस्टो को  कुछ आश्वासन देकर उनकी जान जोखिम में डालकर पैसे की लालच में यहां लाते हैं। और उन्ही के द्वारा यहां नाइट कैंप लगाया गया था और सुबह के सूर्योदय दर्शन की लालच और नाईट कैंप, नाइट में डांस , और रात में ही पर्वत ट्रैकिंग का  आयोजन गया था। और एक बार उन्होंने ट्रैकिंग भी की थी जबकि यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, मधुमक्खियां ,जैसे खतरनाक जानलेवा जानवर रात दिन घूमते रहते हैं।  लेकिन इस और ध्यान आकर्षित करने के बाद वन विभाग ने उस टूर कंपनी की ट्रेकिंग की अभिलाषा बंद कर दी थी. फिर भी यहां पर रोज ही कई चारचाकी और दुचाकी वाहनों से लोग आते रहते हैं पहाड़ों पर चढ़ते रहते हैं। और मधुमक्खियों के हमले में गंभीर रूप से घायल होकर वापस अपने गांव की तरफ भागते रहते हैं ।
  मगर जल्द ही कोई बहुत बड़ी अनहोनी होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता इसलिए वन विभाग ने गंभीर सा गंभीरता से ध्यान देकर सख्त रवैया अपनाना चाहिए ऐसे वन्यजीव प्रेमियों की और परिसर के लोगों ने मांग की थी.
"लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए   वन विभाग द्वारा पेरजागड़ रास्ते पर बैरिकेड लगाकर और बड़े सुचना फलक लगाकर  पेरजागढ़ पर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया है । और सुचना लिख दी है कि , जो इस परिसर में बिना अनुमति प्रवेश करेंगे वह किसी अनहोनी के लिए खुद जिम्मेदार रहेंगे। और वन विभाग द्वारा ऊन पर  दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
- आर.एस. गायकवाड़, क्षेत्र सहायक गोविंदपुर वन क्षेत्र।

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